प्रिय मित्रों आज हम नाम की महत्ता के विषय पर चर्चा करेगें । बहुत से लोग कहते है कि किसी की पहचान उसके नाम से नही वरन उसके कार्य से होती है। मै भी इस कथन से पूर्ण सहमत हूँ ।
लेकिन मेरा मानना यह भी है कि बगैर नाम के व्यक्ति के कार्य की सराहना नहीं हो सकती ।क्योंकि इस जगत मे नाम ही हमारा वह प्रमाण पत्र है जो या तो लोग हमारे काम ,रंग,रूप ,साहस आदि गुणों के आधार पर देते है ।जो हमे स्थान - स्थान पर प्रमाणित करता है कि हाँ ये मैं ही हूं या यह कार्य मैने ही किया है क्योंकि बगैर नाम के कोई भी व्यक्ति किसी के किये हुए कार्य की प्रसंसा नहीं कर सकता। वास्तुतः नाम और कार्य एक -दुसरे के पूरक माने जा सकते हैं क्योंकि बहुत से स्थानों पर व्यक्ति का नाम उसके कार्यों से भी पड़ जाता है। अतः संक्षेप में कहा जा सकता है कि नाम और कार्य दोनों प्रत्येक के पूरक हैं।
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